नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) आज केवल विज्ञान कथाओं या बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रिसर्च लैब तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत के युवाओं के रोजगार और नवाचार का सबसे शक्तिशाली माध्यम बन चुकी है। नैसकॉम (NASSCOM) और नीति आयोग की ताजा संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जनरेटिव एआई और डेटा साइंस सेक्टर में कार्यबल की मांग में पिछले एक वर्ष में 140 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि इस टेक क्रांति की कमान अब केवल बेंगलुरु या गुरुग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि पटना, इंदौर, जयपुर, भुवनेश्वर और कोच्चि जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवा इसमें अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
📌 टेक सेक्टर में एआई बूम के प्रमुख तथ्य:
- स्टार्टअप्स की बाढ़: भारत में पिछले 18 महीनों में 1,200 से अधिक नए जेन-एआई (Gen-AI) स्टार्टअप्स पंजीकृत हुए हैं।
- कृषि और स्वास्थ्य में क्रांति: फसलों की बीमारी पहचान, मिट्टी जांच और स्थानीय भाषाओं में मेडिकल परामर्श देने वाले टूल्स तैयार।
- वेतन में भारी उछाल: एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग स्किल्स वाले फ्रेशर्स को 8 से 15 लाख रुपये तक के शुरुआती पैकेज मिल रहे हैं।
- इंडिया एआई मिशन: केंद्र सरकार द्वारा ₹10,372 करोड़ के बजटीय आवंटन से 10,000 जीपीयू (GPU) सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना।
स्थानीय भाषाओं में एआई समाधान बना रहे हैं भारतीय डेवलपर्स
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी भाषाई विविधता है। भारतीय एआई डेवलपर्स अब अंग्रेजी केंद्रित टूल्स से आगे बढ़कर हिंदी, मैथिली, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु और बंगाली जैसी 22 आधिकारिक भाषाओं में स्थानीय समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। बिहार के दो इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा विकसित "किसान-मित्र एआई" इसका ज्वलंत उदाहरण है, जो व्हाट्सएप पर वॉयस नोट के जरिए किसानों को उनकी स्थानीय बोली में मौसम का पूर्वानुमान, बीज उपचार और मंडी भाव बताता है।
"एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि एआई का उपयोग करने वाला इंसान, उसका उपयोग न करने वाले इंसान की जगह ले लेगा। भारत अपने विशाल डेटा और युवा प्रतिभा के दम पर दुनिया की एआई महाशक्ति बनने की राह पर अग्रसर है।" — अरविंद गुप्ता, डिजिटल इंडिया विशेषज्ञ एवं वेंचर कैपिटलिस्ट
कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में अनिवार्य रूप से जुड़ा एआई
बदलती उद्योग आवश्यकताओं को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और एआईसीटीई (AICTE) ने देश भर के सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी कॉलेजों में एआई साक्षरता को अनिवार्य विषय बना दिया है। युवाओं को सलाह दी जा रही है कि वे कोडिंग के साथ-साथ क्रिटिकल थिंकिंग, डेटा एनालिटिक्स और एआई एथिक्स जैसे कौशलों में खुद को अपस्किल करें।
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