पटना। बिहार के आधारभूत ढांचे में ऐतिहासिक क्रांति लाते हुए केंद्र और राज्य सरकार के साझा सहयोग से महत्वाकांक्षी पटना-पूर्णिया 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NH-131G) को अंतिम प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। लगभग 12,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाला यह आधुनिक एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार और सीमांचल को राजधानी पटना से सीधे एक्सप्रेस कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल यात्रा समय में 60 प्रतिशत तक की कमी आएगी, बल्कि कोसी और सीमांचल क्षेत्र के कृषि और औद्योगिक विकास को नए पंख लगेंगे।
📌 खास बातें (Key Highlights):
- कुल लंबाई व लागत: 215 किलोमीटर लंबा 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे, कुल लागत ₹12,500 करोड़।
- समय की भारी बचत: पटना से पूर्णिया की 9 घंटे की यात्रा घटकर मात्र 3.5 से 4 घंटे रह जाएगी।
- डिजाइन स्पीड: 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार, भविष्य में 6-लेन तक विस्तार योग्य।
- किसानों को वरदान: मक्का, जूट और विश्वप्रसिद्ध मखाना उत्पादकों को सीधे देश की बड़ी मंडियों तक त्वरित पहुंच मिलेगी।
120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार और वर्ल्ड-क्लास सेफ्टी फीचर्स
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा। इसमें अत्याधुनिक एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS), 24x7 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) और मौसम की चेतावनी देने वाले डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। दुर्घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए हर 30 किलोमीटर पर डेडिकेटेड ट्रॉमा सेंटर और एम्बुलेंस बेस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर 1.5 लाख से अधिक फलदार और छायादार वृक्ष लगाए जाएंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक वे-साइड एमिनिटीज (Way-side Amenities) पर अल्ट्रा-फास्ट ईवी चार्जिंग स्टेशन, फूड कोर्ट और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएंगे।
"यह एक्सप्रेसवे केवल कंक्रीट और डामर की सड़क नहीं, बल्कि उत्तर बिहार और सीमांचल के लाखों युवाओं, व्यापारियों और किसानों के सुनहरे भविष्य का राजमार्ग है। इससे बिहार के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।" — आनंद किशोर, प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार
सीमांचल और कोसी के कृषि क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार
पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और सहरसा देश में मक्का और मखाना उत्पादन के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं। वर्तमान में खराब संपर्क और संकरी सड़कों के कारण कृषि उपज को पटना या अन्य राज्यों की बड़ी मंडियों तक पहुंचाने में भारी समय और मालभाड़ा खर्च होता था, जिससे उपज खराब होने का जोखिम बना रहता था।
इस नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बन जाने से किसान अपनी ताजा उपज को कुछ ही घंटों में पटना एयरपोर्ट या राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे महानगरों तक भेज सकेंगे। इससे किसानों की आय में सीधे तौर पर 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि होने का अनुमान है।
📊 परियोजना की एक नज़र में रूपरेखा (Project Snapshot):
भूमि अधिग्रहण में तेजी, तीन पैकेजों में होगा निर्माण
परियोजना के नोडल अधिकारी ने बताया कि एक्सप्रेसवे के संरेखण (Alignment) में पड़ने वाले छह जिलों में भूमि अधिग्रहण का कार्य 72 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। प्रभावित भूस्वामियों को तय समय सीमा के भीतर डीबीटी के माध्यम से मुआवजा वितरित किया जा रहा है। निर्माण कार्य को तीन अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है ताकि कार्य समानांतर रूप से तेजी से आगे बढ़ सके। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में निर्माण एजेंसियां ग्राउंड पर कार्य प्रारंभ कर देंगी।
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