जिनेवा / नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और लाल सागर (Red Sea) संकट के समाधान की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल हुई है। संयुक्त राष्ट्र और तटवर्ती देशों की मध्यस्थता में आयोजित आपातकालीन वैश्विक शिखर सम्मेलन में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर कॉरिडोर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को तुरंत रोकने और निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक संयुक्त कार्ययोजना पर सहमति बन गई है। इस समझौते से स्वेज नहर रूट पर फिर से मालवाहक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद जगी है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ा था भारी दबाव
विगत कई महीनों से समुद्री डाकुओं और विद्रोही गुटों द्वारा कार्गो जहाजों को निशाना बनाए जाने के कारण अधिकांश वैश्विक शिपिंग कंपनियों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा था। इससे न केवल यात्रा में 12 से 15 दिनों का अतिरिक्त समय लग रहा था, बल्कि समुद्री मालभाड़ा (Freight Rates) और बीमा प्रीमियम में 300% से अधिक की अप्रत्याशित वृद्धि हो गई थी। इसका सीधा असर वैश्विक खाद्य पदार्थों, कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर पड़ रहा था।
भारतीय नौसेना की जांबाज भूमिका की विश्व भर में सराहना
इस संकट के दौरान भारतीय नौसेना ने उत्तरी अरब सागर और अदन की खाड़ी में 10 से अधिक युद्धपोत तैनात कर कई विदेशी और भारतीय व्यापारिक जहाजों को अपहरण और ड्रोन हमलों से सुरक्षित बचाया। सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय नौसेना के पेशेवर पराक्रम और 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका की खुले दिल से सराहना की।
- संयुक्त गश्ती दल (Joint Maritime Patrol): समझौते के अनुसार, लाल सागर के संवेदनशील गलियारों में अंतरराष्ट्रीय समुद्री टास्क फोर्स चौबीसों घंटे गश्त करेगी ताकि किसी भी ड्रोन या मिसाइल हमले को हवा में ही निष्प्रभावी किया जा सके।
- बीमा दरों में राहत: जहाजों के बीमाकर्ताओं (P&I Clubs) ने घोषणा की है कि सुरक्षा की गारंटी मिलने के साथ ही वॉर-रिस्क प्रीमियम में तत्काल 40% तक की कटौती की जाएगी, जिससे आयात-निर्यात लागत में कमी आएगी।
- भारतीय निर्यातकों को लाभ: भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाले कपड़ा, बासमती चावल, इंजीनियरिंग सामान और दवाइयों के निर्यातकों को इस समझौते से भारी राहत मिलेगी।
"खुले और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। आज का समझौता वैश्विक शांति और बहुपक्षीय सहयोग की सबसे बड़ी जीत है।" - संयुक्त राष्ट्र महासचिव
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