नई दिल्ली। भारत की विदेश नीति और बहुपक्षीय कूटनीति के लिए वैश्विक मंच पर एक और ऐतिहासिक विजय दर्ज हुई है। नई दिल्ली में संपन्न जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की अनुवर्ती बैठक में भारत द्वारा प्रस्तावित 'वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन' (Global Biofuels Alliance - GBA) पर 19 प्रमुख विकसित और विकासशील देशों ने औपचारिक सहमति पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल-डीजल पर वैश्विक निर्भरता को कम करना, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना और कृषि अवशेषों से जैव ईंधन बनाकर किसानों की आय में वृद्धि करना है।
गठबंधन का मूल एजेंडा और तकनीकी साझेदारी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, वर्तमान में वैश्विक परिवहन क्षेत्र से निकलने वाला ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस के तहत सदस्य देश बायो-एथेनॉल, बायो-डीजल और कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) के उत्पादन, मानकीकरण और सीमा-पार व्यापार को सुगम बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
- एथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending): भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य 2025-26 तक तय किया है। गठबंधन के अन्य देश भी इस मॉडल को अपनाकर जीवाश्म ईंधनों के आयात बिल में अरबों डॉलर की बचत करेंगे।
- कृषि अवशेषों का उपयोग: पराली और गन्ने की खोई से 2G एथेनॉल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और पेटेंट सदस्य देशों के साथ साझा किए जाएंगे, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।
- वित्तपोषण और निवेश: विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से बायोफ्यूल रिफाइनरियों के निर्माण हेतु रियायती ऋण उपलब्ध कराने के लिए 50 अरब डॉलर का ग्रीन फंड तैयार किया जा रहा है।
"वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का वैश्विक महायज्ञ है। इससे अन्नदाता किसान अब ऊर्जादाता बनने की दिशा में अग्रसर होंगे।" - भारतीय विदेश मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य
वैश्विक ऊर्जा कूटनीति में भारत की केंद्रीय भूमिका
अमेरिका, ब्राजील, इटली, अर्जेंटीना और यूएई सहित प्रमुख ऊर्जा उत्पादक और उपभोक्ता देशों की सहभागिता इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु न्याय के क्षेत्र में भारत ग्लोबल साउथ की सबसे सशक्त आवाज़ बनकर उभरा है। इस गठबंधन से भारत में कृषि और ऑटोमोबाइल सेक्टर में 15 लाख से अधिक नए हरित रोजगार पैदा होने की संभावना है।
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