तिरुवनंतपुरम। केरल के राजनीतिक इतिहास में दशकों पुरानी बारी-बारी से सत्ता बदलने (Anti-Incumbency) की परंपरा को दरकिनार करते हुए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंच गया है। 140 सदस्यीय विधानसभा में एलडीएफ गठबंधन 74 सीटों पर मजबूत बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) 62 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेमोम और तिरुवनंतपुरम सेंट्रल में कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला बनाकर 2 सीटों पर बढ़त हासिल की है।
धर्मदम और पुथुपल्ली में दिग्गजों का प्रदर्शन
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कन्नूर जिले की अपनी पारंपरिक धर्मदम विधानसभा सीट से लगातार बढ़त बनाए रखी है। वहीं विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने परवूर से कड़े मुकाबले में कांग्रेस को राहत दिलाई है। पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के बेटे चांडी ओमन पुथुपल्ली सीट से 19,000 से अधिक मतों से विजयी घोषित किए गए हैं।
"केरल की जनता ने हमारे विकास मॉडल, जन-कल्याणकारी सामाजिक पेंशन और आपदा प्रबंधन पर एक बार फिर मुहर लगाई है। यह जीत विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ धर्मनिरपेक्षता की जीत है।" - पिनाराई विजयन, मुख्यमंत्री केरल
किन मुद्दों ने पलटी केरल की बाजी?
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन: वाम सरकार द्वारा समय पर पेंशन वितरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के सुदृढ़ीकरण ने महिला मतदाताओं को एकजुट किया।
- वायनाड आपदा राहत: भूस्खलन के बाद राज्य सरकार द्वारा चलाए गए त्वरित पुनर्वास अभियानों की जनता में गहरी सराहना हुई।
- तटीय और रबर किसान वर्ग: मध्य केरल में चर्च और किसान संगठनों के साथ बेहतर संवाद ने एलडीएफ के पक्ष में माहौल तैयार किया।
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