नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए रेल मंत्रालय ने स्लीपर कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Sleeper) के वाणिज्यिक परिचालन की आधिकारिक रूपरेखा जारी कर दी है। मध्यम और लंबी दूरी के 15 व्यस्ततम रेल कॉरिडोर पर 160 किमी प्रति घंटे की शीर्ष रफ्तार से चलने वाली ये विश्वस्तरीय ट्रेनें राजधानी एक्सप्रेस से भी 2 से 3 घंटे कम समय में यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाएंगी। पहली ट्रेन का ट्रायल रन सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है और इसे अगले महीने हरी झंडी दिखाई जाएगी।
राजधानी से भी आधुनिक और आरामदायक सफर का अनुभव
वंदे भारत स्लीपर का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और बीईएमएल (BEML) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से किया गया है। इसमें यात्रियों की सुख-सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है:
- एर्गोनॉमिक बर्थ डिज़ाइन: पुराने स्लीपर कोचों की तुलना में वंदे भारत स्लीपर में एक्स्ट्रा कुशनिंग, फोल्डेबल स्नैक्स टेबल, यूएसबी व टाइप-सी फास्ट चार्जिंग सॉकेट और हर बर्थ के लिए व्यक्तिगत रीडिंग लाइट्स दी गई हैं।
- कवच 4.0 सुरक्षा प्रणाली: ट्रेन में अत्याधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) 'कवच 4.0' इनबिल्ट है, जिससे दो ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर का खतरा पूरी तरह शून्य हो जाता है।
- एयर-सस्पेंशन और जर्क-फ्री राइड: सेमी-हाई स्पीड पर भी यात्रियों को किसी प्रकार के झटके महसूस न हों, इसके लिए उन्नत एयर-स्प्रिंग सस्पेंशन और रबर कप्लर्स लगाए गए हैं।
- सेंसर युक्त बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स: विमानों की तर्ज पर गंधहीन बायो-वैक्यूम शौचालय, टच-फ्री वॉटर टैप्स और बेबी-केयर चेंजिंग टेबल की सुविधा दी गई है।
पहले चरण में इन 5 प्रमुख रूटों पर दौड़ेगी स्लीपर वंदे भारत:
रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में दिल्ली, पटना, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे प्रमुख महानगरों को जोड़ा जा रहा है:
- नई दिल्ली - पटना (वाया प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन): यात्रा समय घटकर मात्र 9.5 घंटे रह जाएगा।
- नई दिल्ली - मुंबई सेंट्रल (वाया कोटा, रतलाम): देश की वित्तीय राजधानी का सफर 11 घंटे में पूरा होगा।
- नई दिल्ली - हावड़ा: 12 घंटे में कोलकाता पहुंचना संभव होगा।
- बेंगलुरु - एरनाकुलम/कोच्चि: दक्षिण भारत के दो प्रमुख आईटी व व्यापारिक केंद्रों के बीच रातभर में आरामदायक कनेक्टिविटी।
- चेन्नई - सिकंदराबाद: समय में 3 घंटे की ऐतिहासिक बचत।
"वंदे भारत स्लीपर सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए विश्वस्तरीय यात्रा को सुलभ बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है। इसका किराया राजधानी और तेजस एक्सप्रेस के समकक्ष ही रहेगा ताकि हर वर्ग इसका लाभ ले सके।" - वरिष्ठ अधिकारी, रेलवे बोर्ड
ट्रेन के सभी डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे, आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट (जिससे यात्री सीधे लोको पायलट से बात कर सकते हैं) और ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाया गया है। रेलवे का लक्ष्य 2026 तक देश भर में 200 से अधिक स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें चलाने का है।
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