पटना / हाजीपुर। भारतीय रेल के कायाकल्प और यात्रियों को हवाई अड्डे जैसी अत्याधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' (Amrit Bharat Station Scheme) के तहत बिहार के रेल बुनियादी ढांचे में युगांतकारी परिवर्तन हो रहा है। पूर्व मध्य रेल (ECR) के महाप्रबंधक ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि बिहार के कुल 87 छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों का लगभग 3,500 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से संपूर्ण पुनर्विकास कार्य तीव्र गति से चल रहा है। इसमें पटना जंक्शन, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, भागलपुर, सहरसा, बेगूसराय और पूर्णिया जैसे ऐतिहासिक स्टेशन शामिल हैं, जिन्हें भविष्य के 50 वर्षों की यात्री क्षमता को ध्यान में रखकर 'सिटी सेंटर' (City Centre) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
स्टेशनों पर मिलने वाली आधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाएं
पुनर्विकसित अमृत भारत स्टेशनों का डिज़ाइन केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुगमता, पर्यावरण अनुकूलता और दिव्यांगजनों की सुविधा का अनुपम संगम है:
- भव्य रूफ प्लाजा और एयर कॉनकोर्स: बड़े स्टेशनों पर पटरियों के ऊपर 36 मीटर से 72 मीटर चौड़ा विशाल 'एयर कॉनकोर्स' बनाया जा रहा है, जहां यात्रियों के लिए आधुनिक लाउंज, फूड कोर्ट, बच्चों के खेलने का स्थान और रिटेल आउटलेट्स होंगे।
- आगमन और प्रस्थान का अलग पृथक्करण (Segregation): हवाई अड्डों की तर्ज पर आने वाले और जाने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग रास्ते होंगे ताकि प्लेटफॉर्म पर किसी प्रकार की भगदड़ या भीड़भाड़ न हो।
- मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी: रेलवे स्टेशनों को सीधे नजदीकी बस स्टैंड, ऑटो-टैक्सी स्टैंड और मेट्रो स्टेशनों से जोड़ने के लिए एलिवेटेड वॉकवे और स्काईवॉक बनाए जा रहे हैं।
- दिव्यांगजन और बुजुर्ग अनुकूल: हर प्लेटफॉर्म पर चौड़े स्वचालित एस्केलेटर (Escalators), अत्याधुनिक लिफ्ट्स, ब्रेल साइनेज और व्हीलचेयर रैंप्स अनिवार्य रूप से स्थापित किए जा रहे हैं।
- ग्रीन बिल्डिंग और सोलर रूफटॉप: सभी स्टेशनों की छतों पर सोलर पैनल्स लगाए जा रहे हैं जिससे स्टेशनों की 40% बिजली आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी होगी, साथ ही रेन-वाटर हार्वेस्टिंग और एलईडी लाइटिंग लगाई जा रही है।
स्थानीय कला, संस्कृति और 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' को प्रोत्साहन
प्रत्येक स्टेशन की स्थापत्य कला (Architecture) में उस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को प्रमुखता से उकेरा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर गया जंक्शन को भगवान बुद्ध के महाबोधि मंदिर की शैली में, दरभंगा स्टेशन को मैथिली और मिथिला पेंटिंग के रंगों में, भागलपुर को मंजूषा कला और सिल्क हेरिटेज में, और पटना जंक्शन को मौर्यकालीन स्थापत्य के गौरवशाली स्वरूप में ढाला जा रहा है। साथ ही स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और किसानों को सीधा बाजार उपलब्ध कराने के लिए 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (OSOP) के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।
"अमृत भारत स्टेशन केवल रेलगाड़ियों के रुकने का स्थान नहीं होंगे, बल्कि वे उस शहर के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के जीवंत केंद्र बनेंगे। हमारा लक्ष्य 2025 के अंत तक अधिकांश स्टेशनों को जनता को समर्पित करने का है।" - महाप्रबंधक, पूर्व मध्य रेलवे
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