नई दिल्ली। आधुनिक भारतीय खान-पान में अत्यधिक रिफाइंड गेहूं (मैदा) और पॉलिश किए गए सफेद चावल के बढ़ते उपयोग ने देश को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की राजधानी बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 'अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष' घोषित किए जाने के बाद भारत सरकार के 'श्री अन्न' (Shree Anna) मिशन ने देश के पारंपरिक मोटे अनाजों को फिर से हर भारतीय की थाली का अभिन्न हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ी क्रांति की है। पोषण वैज्ञानिकों और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) के अनुसार, ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज केवल पेट भरने का साधन नहीं हैं, बल्कि ये शरीर के लिए संपूर्ण न्यूट्रास्युटिकल सुपरफूड हैं जो ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और आंतों के स्वास्थ्य को प्राकृतिक रूप से दुरुस्त रखते हैं।
1. रागी (Finger Millet) - कैल्शियम और हड्डियों का पावरहाउस
रागी को अनाजों का राजा कहा जाता है क्योंकि इसमें 100 ग्राम में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है, जो दूध की तुलना में तीन गुना अधिक है:
- हड्डियों की मजबूती: बच्चों के शारीरिक विकास और 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का खोखलापन) से बचाव के लिए रागी सबसे उत्तम आहार है।
- नेचुरल रिलैक्सेंट: रागी में भरपूर मात्रा में ट्रिप्टोफैन अमीनो एसिड पाया जाता है जो तनाव को कम कर प्राकृतिक नींद लाने में मदद करता है।
- उपयोग कैसे करें: रागी का चीला, रागी की डोसा, या सर्दियों में रागी की गर्म दलिया नाश्ते में लें।
2. ज्वार (Sorghum) - हृदय और आंतों के लिए सबसे हल्का अनाज
ज्वार पूरी तरह ग्लूटेन-फ्री होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बेहद कम होता है:
- बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) में कमी: ज्वार में प्रचुर मात्रा में फाइटोकेमिकल्स और डाइटरी फाइबर होते हैं जो आंतों में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को बांधकर मल के रास्ते बाहर निकाल देते हैं।
- वजन नियंत्रण: ज्वार की रोटी खाने के बाद लंबे समय तक तृप्ति बनी रहती है, जिससे बार-बार अनहेल्दी स्नैक्स खाने की लालसा खत्म हो जाती है।
- पाचन में आसान: जिन लोगों को गेहूं की रोटी खाने से गैस या पेट फूलने की समस्या होती है, उनके लिए ज्वार की फुल्का रोटी अमृत समान है।
3. बाजरा (Pearl Millet) - ऊर्जा, आयरन और सर्दियों की संजीवनी
बाजरा आयरन, मैग्नीशियम और जिंक का समृद्ध स्रोत है:
- खून की कमी (एनीमिया) दूर करे: भारत में 50% से अधिक महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। बाजरे की रोटी और गुड़ का नियमित सेवन हीमोग्लोबिन स्तर को तेजी से बढ़ाता है।
- ब्लड प्रेशर संतुलन: बाजरे में मौजूद उच्च मैग्नीशियम रक्त वाहिकाओं की दीवारों को लचीला बनाता है और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखता है।
"हमारे पूर्वज इसलिए 90 वर्ष तक बिना घुटनों के दर्द के चलते थे क्योंकि उनकी थाली में गेहूं की जगह मौसम के अनुसार ज्वार, बाजरा और मक्का होता था। अपनी 7 दिनों की थाली में कम से कम 4 दिन मोटे अनाज शामिल करें।" - डॉ. खादर वली, मिलेट मैन ऑफ इंडिया
श्री अन्न अपनाने के 3 सुनहरे नियम:
- भिगोकर पकाएं: मिलेट्स में मौजूद फाइटिक एसिड को निष्क्रिय करने के लिए पकाने से पहले इन्हें कम से कम 4 से 6 घंटे पानी में अवश्य भिगोएं।
- एक समय में एक ही मिलेट: कभी भी 4-5 मिलेट्स का आटा आपस में न मिलाएं। सोमवार को ज्वार, मंगलवार को रागी और बुधवार को बाजरा - इस तरह अलग-अलग सेवन करें।
- पर्याप्त पानी पिएं: मिलेट्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनके सेवन के साथ दिनभर में 2.5 से 3 लीटर पानी पीना अनिवार्य है।
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