नई दिल्ली। भारत में आज हर 10 में से 3 महिलाएं थायरॉइड असंतुलन (हाइपोथायरायडिज्म या हाशिमोटो थायरॉयडिटिस) और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS/PCOD) जैसी हॉर्मोनल समस्याओं से जूझ रही हैं। गले के सामने तितली के आकार की यह छोटी सी ग्रंथि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, मासिक धर्म चक्र और मूड को नियंत्रित करती है। अक्सर महिलाएं वजन बढ़ने, बाल झड़ने और अत्यधिक थकान को सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यह थायरॉइड स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (TSH) के बिगड़े संतुलन का स्पष्ट संकेत होता है। एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स के अनुसार, केवल गोलियों पर निर्भर रहने के बजाय यदि आंतों के स्वास्थ्य, सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) और तनाव पर ध्यान दिया जाए, तो थायरॉइड को प्रभावी रूप से प्रबंधित किया जा सकता है।
महिलाओं में दिखने वाले 6 बड़े लक्षण
- बिना ज्यादा खाए भी वजन का तेजी से बढ़ना: मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण शरीर कैलोरी को फैट में बदलने लगता है।
- लगातार अत्यधिक ठंड लगना: दूसरों की तुलना में सामान्य तापमान में भी हाथ-पैर ठंडे रहना।
- मासिक धर्म (Periods) की अनियमितता: पीरियड्स का देर से आना, अत्यधिक रक्तस्राव या महीनों तक न आना।
- गंभीर मूड स्विंग्स और डिप्रेशन: बिना किसी स्पष्ट कारण के चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और ब्रेन फॉग (ध्यान केंद्रित न कर पाना)।
- त्वचा का अत्यधिक रूखापन और भौंहों के बाहरी बालों का झड़ना: थायरॉइड हार्मोन की कमी से त्वचा की नमी खत्म हो जाती है।
- कब्ज (Chronic Constipation): आंतों की गतिशीलता धीमी पड़ जाना।
थायरॉइड सुधारने के 4 प्रमुख वैज्ञानिक उपाय
1. सेलेनियम, जिंक और आयोडीन का संतुलन
थायरॉइड ग्रंथि निष्क्रिय T4 हार्मोन को सक्रिय T3 हार्मोन में बदलने के लिए सेलेनियम और जिंक पर निर्भर करती है। रोजाना 2 ब्राजील नट्स (या कद्दू व सूरजमुखी के बीज) खाने से दैनिक सेलेनियम की आवश्यकता पूरी हो जाती है। भोजन में हमेशा मानक आयोडीन युक्त नमक का ही इस्तेमाल करें, लेकिन अत्यधिक मात्रा से बचें।
2. आंतों की सूजन (Gut Inflammation) कम करें
लगभग 80% थायरॉइड समस्याएं ऑटोइम्यून (Autoimmune) होती हैं, जिनकी शुरुआत आंतों में लीकी गट (Leaky Gut) से होती है। ग्लूटेन (गेहूं), अत्यधिक रिफाइंड चीनी और पैकेज्ड फूड्स आंतों में सूजन बढ़ाते हैं। अपने आहार में प्रोबायोटिक्स जैसे घर का ताजा दही, छाछ और किण्वित (Fermented) खाद्य पदार्थ शामिल करें।
3. कच्ची क्रूसिफेरस सब्जियों (गोभी, पत्तागोभी) से सावधानी
ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी और शलजम में 'गॉइट्रोजेन' (Goitrogens) होते हैं, जो आयोडीन के अवशोषण को बाधित कर सकते हैं। इन्हें कभी भी कच्चा या सलाद के रूप में न खाएं। अच्छी तरह उबालकर या पकाकर खाने से इनके गॉइट्रोजेनिक तत्व नष्ट हो जाते हैं और ये पूरी तरह सुरक्षित हो जाती हैं।
4. उज्जायी प्राणायाम और सर्वांगासन
योग विज्ञान में थायरॉइड ग्रंथि के लिए 'उज्जायी प्राणायाम' (गले को सिकोड़कर श्वास लेना) और 'सिंहासन' को सबसे प्रभावी माना गया है। यह गले के क्षेत्र में रक्त संचार को उत्तेजित करता है और ग्रंथि की कार्यप्रणाली को सक्रिय रखता है।
"थायरॉइड की गोली हमेशा सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लेनी चाहिए और उसके अगले 45 मिनट तक चाय, कॉफी या नाश्ता बिल्कुल नहीं लेना चाहिए ताकि दवा का पूरा अवशोषण हो सके।" - डॉ. शिखा शर्मा, वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजी सलाहकार
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